संजय निषाद का भाजपा को अल्टीमेटम, अगर हमारा समुदाया दुखी हुआ तो 2022 में बड़ी मुश्किल होगी


लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक है ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां अपने फायदे के हिसाब से समीकरण साधने में जुट गई हैं. एक समुदाया विशेष का प्रतिनिधित्व करने वाले छोटे दल भी दबाव की राजनीति करने लगे हैं. मौजूदा वक्त में यूपी में भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अल्टीमेटम दिया है. उनका कहना है कि यदि निषाद पार्टी की मांगें पूरी नहीं हुई तो भाजपा के लिए 2022 की राह मुश्किल हो जाएगी.

एक न्यूज चैनल से बातचीत में संजय निषाद ने कहा कि यदि निषाद पार्टी दुखी होती है तो भाजपा भी खुश नहीं रह पाएगी. निषाद पार्टी भाजपा से केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह की मांग कर रही है. वहीं अपने कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने का दबाव डाल रही है. साथ निषाद आरक्षण की मांग भी पूरी करने की डिमांड संजय निषाद ने भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखी है. 

कांग्रेस, सपा और बसपा ने हमें छला, भाजपा हमारी मांगें पूरी करे
संजय निषाद ने कहा कि हमने कांग्रेस, सपा और बसपा सबको वोट दिया लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में हम मोदी जी के साथ आए. सपा और बसपा गठबंधन में चुनाव में लड़े लेकिन निषाद समुदाय ने करीब 40 सीटों पर भाजपा के विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हमसे कहा था कि कुछ बड़े राष्ट्रीय मुद्दे हैं, पहले हमें उनको हल करना है. हमें समय दीजिए, आपकी मांगों को पूरा करेंगे. 

लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ. इससे हमारा समाज आंदोलित हो गया. कांग्रेस, सपा, बसपा ने हमें छला, अब भाजपा ने भी हमारी मांगों से ध्यान हटा लिया ​है. भाजपा ने हमसे वादा किया था कि हम आपको मंत्रालय देंगे आप अपने समाज की सेवा करना. यदि हमें मंत्रालय मिला होता तो उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं होने नहीं पातीं. हमारी सभी बातों को जेपी नड्डा ने सुना, अमित शाह ने सुना. उनके पास संदेश जल्दी पहुंच जाए, नहीं तो 2022 बहुत कठिन हो जाएगा.

यूपी के 135 सीटों को प्रभावित करते हैं निषाद सुमदाय के मतदाता
अब आप निषाद पार्टी अध्यक्ष के इस तेवर के पीछे की वजह समझिए. उत्तर प्रदेश में जातिगत वोट बैंक चुनाव को काफी प्रभावित करते हैं. राज्य में सवर्ण मतदाता 19 प्रतिशत, ओबीसी मतदाता 40 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के मतदाता 22 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाता 19 प्रतिशत के करीब हैं. निषाद समुदाय ओबीसी में आता है और पूर्वांचल में करीब 7 प्रतिशत की आबादी है. निषाद वोटर्स प्रदेश की करीब 135 सीटों को प्रभावित करते हैं. ऐसे में यह वोट बैंक यदि छिटकता है तो भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती है. 

संजय निषाद ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी मांगें रखी हैं
संजय निषाद ने कहा अगर बीजेपी हमारी मांगों को नहीं मानती तो हम अलग होकर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं. संजय निषाद ने बीजेपी को अपने पुराने वादे को पूरा करने की बात भी याद दिलाई और कहा उत्तर प्रदेश व केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनको जगह दी जाए. उन्होंने एक राज्यसभा सीट देने के साथ केंद्र व राज्य में उचित सम्मान देने की बात कही. आपको बता दें कि 10 जून को संजय निषाद ने गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुलाकात कर अपनी मांगों को रखा था. उन्होंने जेपी नड्डा से भी मुलाकात की थी.

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