भारत कैसे जीतेगा Black Fungus से जंग? डॉ. सतीश जैन से जानिए अपने सवालों के जवाब


नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच देशभर में म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस (Black Fungus) का खतरा बढ़ता ही जा रहा है. राजस्थान के जयपुर (Jaipur) शहर की बात करें तो यहां सबसे बड़े ईएनटी अस्पताल (ENT Hospital) में इस समय सिर्फ ब्लैक फंगस के मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है. देश के कई राज्यों से बड़ी तादाद में मरीजों के जयपुर आने के पीछे सबसे बड़ी वजह हैं यहां के डॉक्टर सतीश जैन.

मरीजों को सस्ती दवाइयों की जरूरत

डॉ. सतीश जैन (Dr. Satish Jain) अब तक 200 से ज्यादा ब्लैक फंगस के मरीजों की सर्जरी कर चुके हैं. वे इस बीमारी पर लंबे समय से काम कर रहे हैं. डॉ. जैन का मानना है कि, ‘ये बीमारी लाइलाज नहीं है. लेकिन इस बीमारी को समय पर पहचानना जरूरी है. दूसरा बाजारों में इस बीमारी को ठीक करने वाली इंजेक्शन नदारद हैं. हर शख्स ब्लैक फंगस के इलाज को अफोर्ड भी नहीं कर सकता. ऐसे में सरकार अगर डिमांड के मुताबिक व्यवस्था करवाए और इसकी दवा सस्ती हो सके तो लगातार बढ़ रहे मौत के मामलों को कम किया जा सकता है.’

ब्लैक फंगस के चलते हटाना पड़ा पूरा जबड़ा

राजस्थान के बीकानेर जिले के रहने वाले 40 साल के दौलत को कब कोरोना हुआ और कब उन्हें डायबिटीज ने घेर लिया, उन्हें पता नहीं चला. इसके बाद वो ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए. उनकी जान बचाने के लिए उनके पूरे जबड़े को हटाना पड़ा.

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क्या होता है ब्लैक फंगस?

आज आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि ब्लैक फंगस बीमारी है क्या? ब्लैक फंगस कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन पहले इस बीमारी के मामले बहुत रेयर आते थे. ब्लैक फंगस पहले से ही हवा और मिट्टी में मौजूद रहता है. हवा से नाक और फेफड़ों में और वहां से मस्तिष्क तक पहुंच जाता है. जो मरीज जितने लंबे समय तक अस्पताल में रहेगा और जितनी ज्यादा स्टेरॉयड दवाएं खाता रहेगा, उसे ब्लैक फंगस होने का खतरा बढ़ता जाएगा.

स्टेरॉयड से हो रहा कोरोना मरीजों का इलाज

दरअसल, इन दिनों कोरोना संक्रमितों को जल्दी ठीक करने के लिए स्टेरॉयड दी जा रही है. जिस वजह से उनकी इम्यूनिटी कम हो जाती है. शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है. नाक, चेहरे और तलवे की स्किन सुन्न हो जाती है. आंख की नसों के पास फंगस जमा हो जाती है. यही ब्लैक फंगस है.

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ब्लैक फंगस के संभावित लक्षण क्या हैं?

1. नाक में दिक्कत महसूस होना.
2. सिर दर्द करता होना.
3. चेहरे के एक हिस्से में दर्द या सूजन होना.
4. चेहरा सुन्न पड़ जाना.
5. चेहरे के रंग में बदलाव होना.
6. पलकों पर सूजन आना.
7. दांतों में दर्द या दांत हिलने लगें.

ऐसे होता है ब्लैक फंगस के मरीज का इलाज

डॉक्टर्स के मुताबिक, ब्लैक फंगस में एंटीफंगल दवाओं से इलाज, इन्फेक्टेड हिस्सों को निकालने के लिए सर्जरी भी करनी पड़ सकती है. इसमें डायबिटीज कंट्रोल करना बहुत जरूरी है. मरीज की स्टेरॉयड वाली दवाएं कम करनी होगी, और इम्यून मॉड्यूलेटिंग ड्रग्स बंद करके एंटीफंगल दवाओं से इलाज करना होगा. इन्फेक्टेड हिस्सों को निकालने के लिए सर्जरी भी करनी पड़ सकती है. चिकित्सकों मुताबिक, सर्जरी से पहले शरीर में पानी की उचित मात्रा मेंटेन करने के लिए चार-छह हफ्ते IV सेलाइन वाटर चढ़ाना होगा. इससे पहले एंटी फंगल थेरेपी देनी होगी. इसमें अम्फोटेरिसिन बी नाम का एंटी फंगल इंजेक्शन भी शामिल है.

वैक्सीन ना लगवाने वाले लोगों को ज्यादा खतरा

राजस्थान सरकार के म्यूकर माइकोसिस बोर्ड (Mucormycosis Board) ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर बताया गया कि ब्लैक फंगस के 95 प्रतिशत मरीजों में शुगर लेवल बढ़ गया. कई मरीजों को स्टेरॉयड दिया गया, और इनमें से 95 प्रतिशत मरीजों को वैक्सीन भी नहीं लगी थी. ऐसे में ब्लैक फंगस को लेकर जागरूकता जरूरी है, सावधानी जरूरी है. तभी हम कोरोना और म्यूकर माइकोसिस की दोहरी जंग को जीत पाएंगे.

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