अयोध्या जमीन खरीद विवाद: मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भांजे ने आरोपों पर रखा अपना पक्ष


अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर एक और जमीन की खरीद को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं. ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण में वास्तु दोष को समाप्त करने के लिए ईशान कोण की जमीन को सही करने के लिए यह जमीन खरीदी है. अयोध्या के पूर्व विधायक व सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे तेजनारायण पांडेय ने सवाल खड़ा किया है कि ट्रस्ट ने रामकोट मोहल्ले में 20 लाख की जमीन 2.5 करोड़ में कैसे खरीदी है. ट्रस्ट ने समर्पण निधि का दुरुपयोग किया है.

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उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से ट्रस्ट द्वारा जमीन खरीद की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. आरोप है कि अयोध्या के रामकोट मोहल्ले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दीपनारायण से गाटा संख्या 135 व 36 में 16727 वर्ग फुट जमीन की खरीद 3.5 करोड़ में की है. दीपनारायण ने अपनी पैतृक संपत्ति 7200 वर्गफीट जमीन 1 करोड़ रुपये में ट्रस्ट को बेची.

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वहीं साथ कि दूसरी 7527 वर्गफुट जमीन दीपनारायण ने 20 फरवरी 2021 को दशरथ महल बड़ी जगह के महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य से 20 लाख रुपये में खरीदकर 11 मई 2021 को 2.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दिया. इसके बाद सवाल खड़े होने लगे कि आखिर 3 माह में जमीन के दाम 12 गुना कैसे बढ़े. सपा नेता ने कहा कि दीपनारायण अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भांजे हैं, इसलिए उनको आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए जमीन महंगी दाम पर खरीदी गई.

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दीपनारायण ने मीडिया को एक पत्र जारी कर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा है कि मैंने अपनी पैतृक जमीन ट्रस्ट के नाम बेची. साथ ही अपने आवास के लिए खरीदी गई जमीन को भी ट्रस्ट के कहने पर उनके नाम बैनामा कर दिया. मैंने कुल 16727 वर्गफुट जमीन ट्रस्ट को बेची है, जिसका मूल्य 3.5 करोड़ रुपए आरटीजीएस के माध्यम से मेरे बैंक खाते में भेजा गया. उन्होंने 1 करोड़ 8 लाख रुपए आयकर जमा किया है, ऐसे में उनको मात्र 2 करोड़ 36 लाख रुपये ही मिले.

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दीपनारायण के मुताबिक उन्होंने यह जमीन ट्रस्ट को 1412/- स्क्वायर फीट पड़ी है जो बाजार मूल्य से आधे दाम पर है. बाजार मूल्य स्क्वायर फीट 3000 से ऊपर चल रहा है. ट्रस्ट ने गाटा संख्या 135 के बगल में गाटा संख्या 136 की 1660 वर्गफीट जमीन संत रामदास से 3000 रुपये स्क्वायर फीट की दर से खरीदी है. जो उनकी बेची गई जमीन से दोगुनी महंगी है. ट्रस्ट ने जमीन ईमानदारी के साथ खरीदी है और कोई घपला नहीं हुआ है.

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वहीं दीपनारायण को जमीन बेचने वाले दशरथ महल बड़ी जगह के बिंदुगद्दाचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य का कहना है कि वह जमीन उनके गुरु के नाम दर्ज थी. लेकिन नजूल की जमीन थी. इसलिए बहुत कम दाम 20 लाख में दीपनारायण को बेची गई. उनको बताया गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जमीन की जरूरत है क्योंकि उस जमीन पर लोगों को विस्थापित किया जाएगा. उन्होंने ट्रस्ट के नाम पर जमीन बेची है.

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प्रसादाचार्य ने कहा कि ट्रस्ट को जमीन खरीद से पहले इसपर विचार करना चाहिए था कि जमीन कितने में बिकी. हमारे मतलब की जमीन नहीं थी, ट्रस्ट के काम आ रही थी इसलिए इसे बेच दिया. वहीं अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिसद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास का कहना है कि कुछ पार्टियों के नेता ट्रस्ट को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं. ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों के ऊपर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं.

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