DNA ANALYSIS: क्या आप भी पुराने रेडियो के शौकीन हैं? जानिए ये रोचक बातें


नई दिल्‍ली:  रेडियो की दुनिया आज भी जिंदा है. आप भले ही स्मार्टफोन पसंद करते हों, लेकिन कई लोग आज भी रेडियो को अपने घरों में सजाना पसंद करते हैं. जब रेडियो का जमाना था, तो लोग शादी के समय गिफ्ट के तौर पर रेडियो देते थे क्योंकि, ये सिर्फ मनोरंजन और जानकारी का साधन नहीं था, बल्कि एक स्‍टेटस सिंबल हुआ करता था. लोग अपने कंधे पर रेडियो रख कर घूमा करते थे, इसलिए आज हम आपको रेडियो के पुराने दौर में लेकर जा रहे हैं और उसका मधुर संगीत सुना रहे हैं.

रेडियो सेट रिपेयर करने की सबसे पुरानी दुकान 

आज भले ही रेडियो का आकार बेहद छोटा हो गया हो, लेकिन पहले ये पोर्टबेल टीवी के आकार का होता था और एक अलग तकनीक पर काम करता था.आज कल ऐसे रेडियो सेट्स देखने को नहीं मिलते, लेकिन जिनके पास ये है, उनके लिए ये बेहद खास है. ऐसे ही रेडियो सेट्स को रिपेयर करने की एक दुकान हैदराबाद में है, जहां रेडियो का पुराना मधुर संगीत आज भी गुनगुना रहा है. 

तकनीक कितनी भी एडवांस हो जाए, लेकिन कुछ पुरानी चीज़ें, पुरानी ही अच्छी लगती हैं. रेडियो उनमें से एक है. हालांकि आजकल रेडियो मोबाइल पर उपलब्ध हैं, लेकिन पुराने ज़माने के रेडियो दिल को लुभाते हैं. उनका बक्से जैसा आकार, दिल को भा जाता है. आज हम आपको हैदराबाद के एक ऐसे ही दुकान में ले चलेंगे, जहां पुराने रेडियो की भरमार है. ये दुकान एंटिक रेडियो को रिपेयर करने की सबसे पुरानी दुकानों में से एक है. यहां दुनिया के एक से एक पुराने रेडियो मिल जाएंगे. हैदराबाद के महबूब रेडियो सर्विस शॉप में मोहम्मद मुज्जबुद्दीन और उनके छोटे भाई मोहम्मद मोइनुद्दीन आपको 100 साल पुराने रेडियो को भी ठीक करते हुए मिल जाएंगे.

1930 के दशक में शुरू किया था काम 

खराब हो चुके पुराने रेडियो की मरम्मत का काम इन दोनों भाइयों के पिता मोहम्मद महबूब ने 1930 के दशक में शुरू किया था. उस वक्त हैदराबाद के कुछ गिने चुने नवाबों के पास ही रेडियाे हुआ करता था और जब रेडियो खराब हो जाता था तो वो मोहम्मद महबूब के पास ही आते थे. 

पुराने रेडियो को चाहने वालों की कमी आज भी नहीं है. आज भी कई लोग इस दुकान पर आकर पुराने ज़माने के रेडियो की मांग करते हैं. मोहम्मद मुज्जिबुद्दीन और मोइनुद्दीन के हाथों में ऐसा जादू है कि खराब से खराब रेडियो को ठीक कर देते हैं, लेकिन इन दोनों भाइयों को इस बात का गम है कि आखिर इनके बाद इस विरासत को कौन संभालेगा.



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