रामपुर की रजा लाइब्रेरी को मिला दुनिया में 8 वां स्थान, जानें खासियत


रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की जानीमानी रजा लाइब्रेरी पूरे विश्व में देश का नाम रोशन किया है. अब तक यह लाइब्रेरी सिर्फ एशिया में जानी जाती थी. अब वर्ल्ड लेवल पर इसका सम्मान हुआ है.  कनाडा की इन फ्लाट पत्रिका एनरूट ने दुनिया की दस लाइब्रेरियों में रजा लाइब्रेरी को आठवें स्थान पर रखा है.

क्या बोले मीडिया प्रभारी 
रजा लाइब्रेरी के मीडिया प्रभारी हिमांशु सिंह ने बताया कि मासिक पत्रिका में सभी सामग्री फ्रेंच और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होती है. पत्रिका का मुख्यालय मॉन्ट्रियल, क्यूबेक में है. इस पत्रिका ने रामपुर की रज़ा लाइब्रेरी को अपने दुर्लभ संग्रह और शानदार भवन के लिए दुनिया की 10 आश्चर्यजनक लाइब्रेरी में आठवां स्थान प्रदान किया है.

60 हजार किताबे मौजूद हैं इस लाइब्रेरी में 
उन्होंने बताया कि रजा लाइब्रेरी के किताबी खजाने में 17 हजार पांडुलिपियां और 60 हजार किताबें हैं. इनमें हजरत अली के हाथ से हिरन की खाल पर लिखी कुरान के साथ सुमेर चंद की फारसी में सोने के पानी से लिखी रामायण भी शामिल है. इन दुर्लभ पांडुलिपियों को देखने और शोध कार्य के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं. 

1774 में  नवाब फैज ने किया था स्थापित 
रजा लाइब्रेरी नवाब फैज़ उल्ला खान द्वारा 1774 में स्थापित किया गया था. उन्होंने राज्य पर 1794 तक शासन किया, और उनकी विरासत संग्रह के माध्यम से लाइब्रेरी के गठन द्वारा केन्द्रीय भाग मे स्थापित कर दी गई . पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, इस्लामी सुलेख के नमूने, लघु चित्र, खगोलीय उपकरण और अरबी और फारसी भाषा की पुस्तकों के लिए ये लाइब्रेरी जानी जाती है. रज़ा लाइब्रेरी में संस्कृत, हिंदी, उर्दू, अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकें दस्तावेजों के अलावा इस्लामी धर्म ग्रंथ कुरान-ए-पाक के पहले अनुवाद की मूल पांडुलिपि है, तमिल और तुर्की में मुद्रित भी हैं. वहीं लगभग 30,000 मुद्रित किताबें और पत्रिकाएं अनेक भाषाओं में उपस्थित हैं.

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