Delhi Economic Survey: मनीष सिसोदिया ने पेश किया खर्च का ब्योरा, दिखाया सरकार का रोडमैप


नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा (Delhi Assembly) के बजट सत्र की कार्यवाही सोमवार को उप-राज्यपाल (Lieutenant Government) के अभिभाषण के साथ शुरू हो गई. वर्तमान बजट सत्र 16 मार्च तक चलेगा. उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) बतौर वित्त मंत्री मंगलवार को साल 2021-22 का बजट पेश करेंगे. बजट पेश करने से पहले दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण (Delhi Economic Survey) और आउटकम बजट 2020-21 की रिपोर्ट में सदन के पटल पर रखी गई.

जीएसडीपी में गिरावट

रिपोर्ट पेश करते हुए सिसोदिया ने बताया कि 2020-21 में प्रचलित मूल्यों पर दिल्ली के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (Gross State Domestic Product) का आकलन 7,98,310 करोड़ है. जिसमें पिछले साल के मुकाबले 3.92% फीसदी की गिरावट आई है. इसके पीछे कोरोना महामारी को एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

प्रति छात्र खर्च में बढ़ोतरी

सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति 98 फीसदी हो गई है. इस दौरान सरकार ने अपने कुल बजट का 23.2 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया. सरकार ने कोरोना काल में 10 लाख लोगों को तीन महीने तक रोजाना दिन में दो बार भोजन कराया. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 5,691 मान्यता प्राप्त स्कूल हैं जिसमें 44.76 लाख छात्र पढ़ते हैं.

दिल्ली सरकार के सरकारी और सरकारी मदद प्राप्त 1230 स्कूल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने शिक्षा पर 2016-17 में सालाना प्रति छात्र खर्च 50,812 रुपये को बढ़ाकर 2020-21 में 78,082 रुपये कर दिया.

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लोड शेडिंग घटी

दिल्ली में लोड शेडिंग यानी बिजली की कटौती घटकर कुल उपभोग का सिर्फ 0.03 फीसद रह गई है, जो पिछले बीस साल में सबसे कम है. DEC रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा तब हुआ है, जब इस दशक में उपभोक्ताओं की संख्या में 81.74 % का इजाफा हुआ है. सबसे ज्यादा बिजली खपत वाले शहरों में शुमार दिल्ली में बिजली का इस्तेमाल साल 2010-11 के 25,668 MU से बढ़कर 2019-20 में 33,082 MU’ हो गया है.

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