International Women Day: आत्मनिर्भरता-सशक्तीकरण की मिसाल हैं Dungarpur की ‘दुर्गाएं’


Dungarpur: पूरा विश्व 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाता है. इधर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हम आपको मिलवा रहे आदिवासी बहुल डूंगरपुर (Dungarpur) जिले की उन आदिवासी महिलाओं से, जो कभी चूल्हे-चौके और खेतों में व्यस्त रहा करती थी लेकिन आज ये आदिवासी महिलाएं अब इंजीनियर बन गई हैं और सोलर एनर्जी जैसे तकनीकी उद्योग को संभालते हुए सफल बिजनस वुमैन (Business woman) सी कार्य कर रही हैं. 

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ये आदिवासी महिलाएं अपने हाथों से सोलर लैंप, एलइडी बल्ब जैसे कई बिजली उपकरण बना रही हैं, जिसकी डूंगरपुर ही नहीं, राजस्थान (Rajasthan) सहित देश के कई राज्यों में डिमांड है. इतना ही नहीं, दुर्गा सोलर एनर्जी में सीईओ से लेकर कर्मचारी सभी महिलाएं ही हैं. यह महिलाएं विश्व महिला दिवस के मौके पर अन्य महिलाओ को स्वावलम्बी व सशक्त होने का सन्देश दे रही हैं. 

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डूंगरपुर जिले में आदिवासी महिलाओं को रोजगार से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (Renewable Energy Technology Private Limited) कंपनी की शुरुआत की गई. वर्ष 2016 में जिला प्रशासन, राजस्थान आजीविका मिशन (Rajasthan Livelihood Mission) के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह को जोड़ते हुए मुंबई आईआईटी के इंजीनियरों की ओर से प्रशिक्षण दिया गया. इसके बाद यहां सोलर लैंप बनाने का काम शुरू हुआ. आज यहां की महिलाएं इंजीनियर की तरह काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट में सभी महिलाएं होने के कारण इसका नामकरण भी “दुर्गा” सोलर एनर्जी रखा. यहां महिलाओं के हाथ अब चूल्हा- चौका व घरेलू काम करने के साथ ही सोलर पैनल, सोलर लैंप, एलईडी बल्ब, हैलोजन लाइट, सोलर चार्जिंग लाइट बनाने का कार्य कर रही है. महिलाओं के हाथों में अब इलेक्ट्रिक सोल्डर जैसे उपकरण है जो एक-एक पार्ट्स को जोड़कर कई तरह की लाइटस से बना रही है. यह देश की पहली कंपनी है जिसमें सीईओ से लेकर काम करने वाली कर्मचारी सभी महिलाएं ही हैं, जिनके हाथों में प्रोडक्शन से लेकर मैनेजमेंट के कार्य को बखूबी अंजाम दे रही हैं.

55 आदिवासी महिलाएं कर रही हैं काम
इस कंपनी में 55 आदिवासी महिलाएं काम कर रही हैं. इन महिलाओं ने बताया कि वे पहले घर में खाना बनाना, झाड़ू-पोछा का काम करती थी. इसके बाद मनरेगा में मजदूरी के लिए भी जाती थी, लेकिन इस कंपनी में आने के बाद उन्हें सोलर पैनल, सोलर लैंप, एलइडी बल्ब व अन्य उपकरण बनाने का प्रशिक्षण मिला, जिसके बाद वे अपने घर का कामकाज निपटा कर यहां आती हैं. महिलाएं बताती हैं कि वे हर महीने 10 से ₹15 हजार तक कमा लेती हैं. इससे उनके घर में आर्थिक मदद मिल जाती हैं. महिलाओं ने बताया कि आज उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ रहे हैं और कुछ बचत भी होती है.

पीएम भी कर चुके हैं सम्मानित
डूंगरपुर रिन्युएबल एनर्जी टेक्नोलोजिज प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी की स्थापना होने से डूंगरपुर जिले में सोलर एनर्जी को तो बढ़ावा मिला है, वहीं, आजीविका अर्जन के साथ अंचल में शैक्षिक विकास व महिला सशक्तिकरण की गतिविधियों के लिए डूंगरपुर देश—प्रदेश में नाम कमा रहा है. आदिवासी महिला इंजीनियरों द्वारा चलाई जाने वाली इन गतिविधियों के कारण ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी अप्रैल 2017 में तत्कालीन कलेक्टर को सम्मानित भी कर चुके हैं. 

बहरहाल, आदिवासी महिलाओं को इंजीनियर बनाने और खुद की कंपनी स्थापित कर सोलर लैंप सरीखा तकनीकी उपक्रम से जुड़ने का कार्य वास्तव में अनूठा ही है. इससे जहां महिलाएं स्वावलंबी और सशक्त हो रही हैं, वहीं, सोलर एनर्जी की जीवन में उपयोगिता को भी साबित कर रही है.

Reporter- अखिलेश शर्मा 

 



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