International Women Day: अवनी ने कमजोरी को बनाया ताकत और जीता Golden Girl का ‘तमगा’


Jaipur: ‘गोल्डन गर्ल’ (Golden Girl) के नाम से नाम से पूरी दुनिया में नाम कमाने वाली अवली लेखरा किसी पहचान की मोहताज नहीं है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day 2021)  पर अवनी का जिक्र ना हो ऐसा नहीं हो सकता है. पैरा निशानेबाजी (Para Shooting) में हर बार गोल्ड पर निशाना साधना जैसे अवनी की आदत बन चुकी है और इस आदत ने अवनी को ‘गोल्डन गर्ल’ के नाम से एक अलग पहचान दिलाई. अब अवनी अगस्त 2021 में टोक्यो पैरा ओलम्पिक (Tokoyo Para Olympic) का टिकट कटा चुकी हैं.

दरअसल, प्रवीण लेखरा के घर में नवंबर 2001 में एक प्यारी सी बिटिया का जन्म हुआ. बचपन से ही मां-बाप की प्यारी अवनी बचपन से ही बड़ी नटखट थी. परिवार की चेहती अवनी के जीवन में साल 2012 में ऐसा मोड़ आया जिसने अवनी की दुनिया ही बदल दी. 2012 में पिता के साथ जा रही 11 साल की अवनी का कार एक्सीडेंट हुआ और इस एक्सीडेंट के बाद अवनी कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकी.

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इस एक्सीडेंट के बाद अवनी ने पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बनाया. लेकिन एक बार फिर से साल 2015 में अवनी के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरे विश्व में अवनी को एक अलग ही पहचान दिला दी. 2015 में समर वेकेशन  (Summer Vaccation) में जगतपुरा शूटिंग रेंज में घूमने गई अवनी ने पहली बार राइफल को अपने हाथ में थामा. सिर्फ शोखिया तौर पर राइफल हाथ में लेने वाली अवनी को पता नहीं था कि एक दिन ये राइफल उनके विश्व स्तरीय पहचान दिलाएगी.

अवनी लेखरा ने अगस्त 2015 में राइफल उधार लेकर पहली बार स्टेट लेवल पर गोल्ड मैडल जीता. इसके बाद अवनी ने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा. स्टेट में दर्जनों गोल्ड जीतने के बाद अवनी ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की ओर रुख किया. साल 2015 में ही नेशनल लेवल में पहली बार हिस्सा ले रही अवनी ने कांस्य पदक पर निशाना साधा. गोल्ड की आदत डाल चुकी अवनी को ये कांस्य रास नहीं आया और कड़ी मेहनत के बाद साल 2017 के नेशनल में अवनी ने गोल्ड पर निशाना साधा और इसके बाद तो अवनी ने गोल्ड पर निशाना साधने की झड़ी लगा दी. 

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अब तो खुद अवनी तक को याद नहीं है कि वो कितने गोल्ड जीत चुकी हैं. पिछले दिनों आयोजित पैरा निशानेबाजी प्रतियोगिता में तो अवनी ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए 6 गोल्ड (Gold) और दो सिल्वर (Silver) पर निशाना साधा.

अवनी ने कहा, ’15 मार्च से UAE में आयोजित हो रहे World Cup में चार इवेंट में हिस्सा ले रही हैं और इस प्रतियोगिता को वो ओलम्पिक की तैयारियों के रूप में देखती हैं. अवनी ओलम्पिक में चार इवेंट में हिस्सा लेंगी.10 मीटर एयर राइफल स्टेंडिंग,10 मीटर एयर राइफल प्रोन, 50 मीटर प्रोन और 50 मीटर 3 पोजिशन में हिस्सा लेंगी. इसके साथ ही ओलम्पिक में गोल्ड पर निशाना साधना ही अवनी का एक मात्र लक्ष्य हैं. क्योंकि आज तक किसी महिला खिलाड़ी ने पैरा ओलम्पिक में गोल्ड पर निशाना नहीं साधा है.’

वहीं, अवनी अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और छोटे भाई को देती है. अवनी के पिता प्रवीण लेखरा और माता श्वेता लेखरा का कहना है, ‘2012 में जब एक्सीडेंट हुआ तो वो समय सबसे मुश्किल था. लेकिन अवनी ने उस एक्सीडेंट की कड़वी यादों को पीछे छोड़ते हुए आज वो मुकाम हासिल कर लिया है, जिसकी वो हकदार थी. इसके साथ ही पढ़ाई में भी अवनी का कोई जवाब नहीं है.’ आज अवनी उन तमाम महिलाओं के लिए एक आदर्श बन चुकी है, जिन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया. 



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