Corona Epidemic से दुनिया में महिलाओं की हालत हुई बदतर, United Nations Women Commission ने जताई चिंता


न्यूयार्क: संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग (United Nations Women Commission) ने कोरोना महामारी (Corona Epidemic) की वजह से महिलाओं (Women) पर पड़े असर पर चिंता जताई है. आयोग में भारतीय मूल की शीर्ष अधिकारी अनिता भाटिया (Anita Bhatia) ने कहा है कि कोरोना महामारी ने महिलाओं की आय, स्वास्थ्य और सुरक्षा को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है.

‘कोरोना महामारी से बढ़ी महिलाओं की समस्याएं’

अनिता भाटिया ने 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले कहा कि कोरोना की वजह से महिलाओं (Women) की समस्या बढ़ गई है. बच्चों और परिवार की देखभाल को लेकर बढ़ी जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए कार्यस्थल पर फिर से लौटना असंभव सा हो गया है. अनिता भाटिया United Nations Women Commission में असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल और उप कार्यकारी निदेशक हैं.

‘पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर ज्यादा असर’

अनिता भाटिया (Anita Bhatia) ने कहा, ‘महामारी  (Corona Epidemic) के एक वर्ष में हम इन चीजों का वास्तविक प्रभाव देख रहे हैं. लेकिन एक बात महामारी के माध्यम से स्पष्ट हो गई है. वह ये है कि महिलाओं पर अब देखभाल का बोझ बढ़ा है.’ भाटिया ने कहा कि महिलाओं पर महामारी का प्रभाव पुरुषों के मुकाबले ज्यादा रहा है और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के कारण महिलाओं की आय, स्वास्थ्य और सुरक्षा नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रही हैं.

‘महिलाओं की जिम्मेदारी चार गुना ज्यादा बढ़ी’

उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से पहले पुरुषों की तुलना में महिलाएं (Women) बिना वेतन के पारिवारिक देखभाल के काम तीन गुना ज्यादा कर रही थी. अब यह काम और बढ़ गया है. महिलाओं को अपने घर का काम करने के साथ ही बच्चों के होमवर्क में भी मदद करनी पड़ रही है. उन्हें यह भी सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि भोजन उनकी मेज पर हो.

‘महिलाओं को नहीं मिल रही हैं नौकरियां’

अनिता भाटिया (Anita Bhatia) ने कहा, ‘कोरोना महामारी  (Corona Epidemic) के इस एक साल में महिलाओं ने बड़ी मात्रा में नौकरी गंवाई हैं. अब अर्थव्यवस्थाओं के खुलने के बाद भी महिलाओं को उतनी तादाद में नौकरी पर नहीं रखा जा रहा है, जितनी तादाद में उन्हें निकाला गया था.’ उन्होंने आगाह किया कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो सभी देशों में उत्पादकता में गिरावट देखी जाएगी क्योंकि आधी आबादी काम नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि उत्पादकता में गिरावट के बाद जीडीपी में भी गिरावट होगी.

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‘सरकारों और कंपनियों को नजरिया बदलना होगा’

उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि सरकारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार करने और नकदी अंतरण योजना के बारे में सोचना होगा. सरकारों के साथ ही अब कंपनियों को भी महिलाओं (Women) को बच्चों की देखभाल की सुविधा देने और सुविधाजनक काम के घंटे उपलब्ध कराने के बारे में सोचना होगा. अनिता भाटिया ने कहा कि सरकारों को डिजिटल संरचना और कौशल में निवेश जारी रखना होगा. उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि सभी महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ हासिल हो. 

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