Jaipur News: Mukundara Hills Tiger Reserve को आबाद करने में छूटे वन विभाग के पसीने


Jaipur: मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व (Mukundara Hills Tiger Reserve) से संकट के काले बादल अभी खत्म नहीं हो रहे हैं. वन विभाग के सामने मुकुंदरा को फिर से आबाद करने में कई चुनौती खड़ी हो गई है.

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ऐसा माना जा रहा है कि अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने भी इसे दोबारा आबाद करने की स्वीकृति देने में हाथ खींच लिए हैं. 7 महीने पूर्व यहां लापरवाही से बदले मंजर को देखते हुए अब इसकी मुश्किलें बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार भी इसको लेकर कोई खास रूचि नहीं दिखा रही है. 

राज्य के तीसरे टाइगर रिजर्व के तौर पर वर्ष 2013 में 82 स्क्वायर किलोमीटर मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व अस्तित्व में लाया गया. वर्ष 2018 में यहां बाघों को बसाया जा सका. तीन बाघ को रणथंभौर (Ranthambore) से लाया गया जबकि एक बाघ चलकर यहां पहुंचा था. ऐसे इनकी संख्या बढ़कर 7 हो गई थी. पिछले साल देखते ही देखते मुकुंदरा लापरवाही की भेंट चढ़ गया. 7 में से 6 बाघ(शावक समेत) कुछ लापता हो गए तो कुछ मर गए. वहीं एक गायब है, जिसके जिंदा होने के कोई भी सबूत नहीं मिले हैं. इस स्थिति में खाली हो गए मुकुंदरा को फिर से आबाद करने के लिए वन विभाग ने एनटीसीए से बाघों को यहां लाकर छोडऩे की स्वीकृति मांगी लेकिन उन्होंने इस पर सहमति नहीं दी है.

क्या कहना है वन्यजीव विशेषज्ञों का 
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मुकुंदरा पूर्ववती राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था, इसलिए वर्तमान राज्य सरकार का इस पर फोकस नहीं है. इस पर 30 करोड़ रुपये भी खर्च हो चुके लेकिन परिणाम जीरो साबित हुए हैं. इसे संजीवनी देने के लिए राज्य सरकार को नए सिरे से कदम उठाने होंगे. बजट में भी इसको लेकर कोई बात नहीं हुई.  

मिला था एक विशेष कंकाल
यहां एमटी- बाघ का 7 महीने बाद भी कोई सुराग नहीं लगा है, जिससे वन्यजीवों प्रेमियों में निराशा है, वहीं, दूसरी ओर वन अधिकारियों की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इस बाघ को वन विभाग ने बूंदी की रामगढ़ सेंचुरी से लेकर 3 अप्रैल 2018 को यहां शिफ्ट किया था लेकिन गत वर्ष अगस्त माह में यह बाघ अचानक लापता हो गया. यह अचानक कहां चला गया, इसको लेकर अभी तक कुछ पता नहीं है हालांकि कुछ दिनों पूर्व एक कंकाल मिला था, उसे पुष्टि के लिए जांच के लिए भेजा गया है. अफसरों की मानें तो प्रथम दृष्टया वह भालू का है.

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे विकसित किया गया था लेकिन वो भी पूरा नहीं हो सका. वन अधिकारियों ने बताया कि गत वर्ष इसे पर्यटकों के खोलने के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया लेकिन उस पर भी मुहर नहीं लगी. यहां चार जोन बनाए गए थे, जिसमें पर्यटक बाघों की अठखेलियां देख सकेंगे. वन विभाग की बेरूखी कहे या अनदेखी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

 



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