राहुल गांधी पर बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने बोला जोरदार हमला, 46 साल इन्हें सिर्फ गलती मानने में लग गए


नई दिल्ली: बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और मौजूदा समय में बीजेपी की तरफ से राज्यसभा सांसद सुशील मोदी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला.  उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बतायें कि देश के पहले पांच शिक्षा मंत्री केवल एक ही समुदाय से क्यों बनाये गए? भारत का विकृत इतिहास पढ़ाये जाने और भगवान राम का अस्तित्व नकारने के लिए क्या कांग्रेस माफी मांगेगी?

इमरजेंसी को लेकर दिए बयान पर बोला हमला

सुशील मोदी ने अगले ट्वीट में लिखा कि लोकतंत्र के साथ इतने बड़े अपराध को दबी जुबान से केवल “गलती” मानने में कांग्रेस को 46 साल लग गए. राहुल गांधी 15 साल से सांसद हैं और पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने आपातकाल थोपने का अपने दल का गुनाह कुबूल करने में इतनी देर क्यों की? इंदिरा गांधी ने 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बाद अपनी सत्ता बचाने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित सारे संवैधानिक अधिकार छीन कर लाखों सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया था.

संस्थानों में खास विचारधारा के लोगों पर भी उठाए सवाल

सुशील मोदी ने अगले ट्वीट्स में लिखा कि राहुल गांधी बतायें कि आजादी के बाद कांग्रेस के 60 साल के एकछत्र शासन के दौरान लगभग 200 सरकारी भवनों, संस्थाओं, सार्वजनिक स्थलों के नाम केवल नेहरू-गांधी परिवार के व्यक्तियों से क्यों जोड़े गए? राहुल गांधी RSS के लोगों की योग्यता और नियुक्ति पर सवाल उठाने से पहले बतायें कि देश की शिक्षा व्यवस्था में कम्युनिस्टों, जेहादियो और सनातन धर्म से दुराग्रह रखने वाले लोगों को ही क्यों भरा गया? क्या यह सच नहीं कि यूपीए के शासनकाल तक जेएनयू जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों, प्रसार भारती और राज्यसभा-लोकसभा टीवी जैसे सरकारी प्रसार माध्यम और बड़े मीडिया घरानों तक के शीर्ष पदों पर भाजपा-विरोधी विचारधारा के लोग ही नियुक्त होते रहे? राहुल गांधी को आपातकाल लगाने का ही नहींं, संस्थाओं के राजनीतिकरण का अपराध भी स्वीकार करना चाहिए.

राहुल ने कहा था, इमरजेंसी लगाना गलती थी

बता दें कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा था कि मेरी दादी ने कहा था कि साल 1975 में देश पर आपातकाल थोपना एक गलती थी. गौरतलब है कि साल 1975 में इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए देश में आपातकाल की घोषणा की थी. ये घोषणा इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद आई थी, जिसमें उन्हें संसदीय चुनावी प्रक्रिया से 6 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था. साथ ही पूरे देश में उनके खिलाफ जेपी की अगुवाई में जोरदार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे.



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