भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 0.4 प्रतिशत बढ़ी GDP


नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था वृद्धि के रास्ते पर आ गई है. भारत की कृषि, सेवा और निर्माण क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन के कारण चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इससे पहले, कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ के बीच लगातार दो तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में गिरावट दर्ज की गयी थी.  व्यापार और होटल उद्योग में चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 7.7 प्रतिशत की गिरावट आयी. कोरोना संकट का क्षेत्र पर असर अब भी जारी है.

एनएसओ ने जारी किया आंकड़ा

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आलोच्य तिमाही में कृषि क्षेत्र में 3.9 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. निर्माण क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत जबकि बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगी सेवाओं में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. एनएसओ के अनुसार, ‘चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में स्थिर मूल्य (2011-12) पर जीडीपी 36.22 लाख करोड़ रुपये रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में 36.08 लाख करोड़ रुपये थी. यानी जीडीपी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.’  वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. एनएसओ के राष्ट्रीय लेखा के दूसरे अग्रिम अनुमान में 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया गया है. जनवरी में एनएसओ ने पहले अग्रिम अनुमान में चालू वित्त वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था (Economy) में 7.7 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया था.  आंकड़ों के अनुसार, ‘वास्तविक जीडीपी स्थिर मूल्य (2011-12) पर 2020-21 में 134.09 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाने का अनुमान है जो 2019-20 में 29 जनवरी 2021 को जारी पहले संशोधित अनुमान के अनुसार 145.69 लाख करोड़ रुपये था.’ ‘वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 8 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है जबकि 2019-20 में इसमें 4.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.’ कोरोना वायरस महामारी और उसकी रोकथाम के लिये लगाये गये ‘लॉकडाउन’ के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था में 24.4 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. वहीं दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में जीडीपी में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी. इससे पहले नवंबर में जारी अस्थायी अनुमान में पहली और दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान (-) 24.9 प्रतिशत और (-) 7.5 प्रतिशत था. 

 

 

प्रति व्यक्ति आय घटी

वास्तविक आधार पर (2011-12 के मूल्य) पर प्रति व्यक्ति आय 2020-21 में 85,929 रुपये रहने का अनुमान है जो 2019-20 में 94,566 रुपये थी. यह 9.1 प्रतिशत की गिरावट को बताता है जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में इसमें 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. बाजार मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 2020-21 में 1,27,768 रुपये रही. यह 2019-20 में 1,34,186 रुपये के मुकाबले 4.8 प्रतिशत कम है. एनएसओ ने कहा, ‘सरकार ने कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिये जो कदम उठाये हैं, उसका आर्थिक गतिविधियों के साथ आंकड़ा संग्रह व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ा है.’ एनएसओ के अनुसार, ‘आईआईपी (औद्योगिक उत्पादन) और सीपीआई (खुदरा मुद्रास्फीति) जैसे अन्य वृहत आर्थिक संकेतकों के मामले में आंकड़ों को लेकर चुनौतियां रही हैं. इनका उपयोग राष्ट्रीय लेखा के अनुमान में किया जाता है. इसके साथ सरकार द्वारा उसके बाद के महीनों में महामारी के कारण प्रभावित अर्थव्यवस्था के पुनरूद्धार को लेकर कदम उठाये जाते हैं, तो उन उपायों का असर होगा और फलत: इन अनुमानों की समीक्षा की जा सकती है.’

v शेप में उठेगी अर्थव्यवस्था

वित्त मंत्रालय ने कहा कि दिसंबर तिमाही में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि यह बताती है कि अर्थव्यवस्था महामारी के पूर्व स्तर पर आ गयी है और पुनरूद्धार का ग्राफ आने वाले समय में तीव्र गति यानी V आकार में उठेगा. मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था महामारी पूर्व के वृद्धि के रास्ते पर लौट आयी है. यह पहली तिमाही में जीडीपी में बड़ी गिरावट के बाद दूसरी तिमाही में शुरू तीव्र गति से पुनरूद्धार के और मजबूत होने को प्रतिबिंबित करता है…’ इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में जीडीपी और जीवीए (सकल मूल्य वर्धन) दोनों में वृद्धि के लौटने के सााथ महामारी संकट के कारण तकनीकी रूप से जो मंदी की स्थिति आयी थी, वह समाप्त हो गई है. यह हमारे अनुमान के अनुरूप है.’ उन्होंने कहा कि एनएसओ ने तीसरी तिमाही में जीडीपी में 0.4 प्रतिशत और जीवीए में 1.0 प्रतिशत वृद्धि की बात कही है जबकि इक्रा ने 0.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था. उद्योग मंडल सीआआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि तीसरी तिमाही में जीडीपी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि एक बढ़िया संकेत है. यह संकेत देता है कि महामारी संकट के कारण जो पहली छमाही में मंदी की स्थिति बनी थी, वह अब समाप्त हो गयी है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट के जरिये वृद्धि के लिये जो प्रोत्साहन दिये गये हैं और उत्पादन आधरित प्रोत्साहन (पीएलआई) समेत अन्य उपायों से वृद्धि में आने वाले समय में तेजी आएगी. डेलॉयट इंडिया के भागीदारी संजय कुमार ने कहा, ‘चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में वृद्धि दर में और तेजी देखने को मिलेगी क्योंकि तिमाही के दौरान कई क्षेत्रों खासकर होटल और यात्रा जैसे क्षेत्रों में काफी ढील दी गयी है.’

अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत

एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि तीसरी तिमाही में जीडीपी में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि कोई अचंभित करने वाला नहीं है बल्कि यह दो तिमाही की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के वृद्धि के रास्ते पर लौटने का संकेत है. उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही और बेहतर रहने की उम्मीद है. चीन की अर्थव्यवस्था में अक्टूबर-दिसंबर, 2020 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. वहीं जुलाई-सितंबर में वृद्धि दर 4.9 प्रतिशत रही थी. एम्के वेल्थ मैनेजमेंट के अनुसंधान प्रमुख डा जोजफ थामस ने कहा कि इन आंकड़ों में विस्तृत क्षेत्रों में सुधार दिखता है. नारेडकों महाराष्ट्र के संयुक्त सचिव रोहित पोद्दार ने कहा कि जीडीपी में और तीव्र वृद्धि हासिल करने के लिए सेवा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है. नाइट फ्रैंक इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि अर्थव्यवस्था ‘सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रही है. पिछले कुछ महीनों से ज्यादातर आर्थिक संकेतकों में सुधार दिख रहा है। ऐसे में तीसरी तिमही में अर्थव्यवस्था के पुन: वृद्धि की रहा पर लौटने में कोई आश्चर्य नहीं है.’

 

 

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जनवरी में आठ मुख्य उद्योगों का उत्पादन 0.1 प्रतिशत बढ़ा

वहीं, इस साल जनवरी महीने में आठ बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत बढ़ा. यह मुख्य रूप से उर्वरक, इस्पात और बिजली के उत्पादन में वृद्धि के कारण हुआ. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2020 में इन क्षेत्रों का उत्पादन 2.2 प्रतिशत बढ़ा था. जनवरी 2021 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और सीमेंट के उत्पादन में गिरावट आयी. हालांकि, उर्वरक, इस्पात और बिजली के उत्पादन में क्रमशः 2.7 प्रतिशत, 2.6 प्रतिशत और 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई. अप्रैल-जनवरी 2020-21 के दौरान, इन क्षेत्रों का उत्पादन साल भर पहले की इसी अवधि में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में 8.8 प्रतिशत गिरा. आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 40.27 प्रतिशत योगदान देते हैं.



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