कोरोनिल अब कोई सीक्रेट दवा नहीं, पतंजलि ने IMA के आरोपों के बाद कही ये बात


नई दिल्ली:  पतंजलि कंपनी के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने कोरोनिल दवा को लेकर सोशल मीडिया पर एक प्रेस रिलीज जारी किया है, जिसमें उन्होंने पतंजलि की कोरोनिल दवा तमाम अफवाहों पर विराम देने की कोशिश की है. उन्होंने पतंजिल रिचर्स फाउंडेशन ट्रस्ट (Patanjali Research Foundation Trust) की ओर से कहा कि कोरोनिल दवा कोई सीक्रेट दवा (Secret Medicine) नहीं है. इसके बारे में सारी डिटेल्स दवा की पैकिंग पर मौजूद है. 

आचार्य बालकृष्ण की प्रेस रिलीज

आचार्य बालकृष्ण (Acharya Balkrishna) ने इंडियन मेडिकल एसोशिएसन (आईएमए) की ओर से कोरोनिल दवा को लेकर लगाए आरोपों पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि कोरोनिल एविडेंस बेस्ड मेडिकल है, जो साइंटिफिक रिसर्च के बाद और क्लीनिकल ट्रायल के बाद बनी है. प्रेस रिलीज में कहा गया है कि कोरोनिल (Coronil) दवा के बारे में सूचना सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है और इसे लाइसेंसिंग अथॉरिटी की ओर से अप्रूवल दिया दया है. कोरोनिल दवा में क्या-क्या यौगिक हैं, उनकी जानकारियां पैकेज पर लिखी हुई हैं. ऐसे में ये कोई सीक्रेट दवा नहीं है. इस प्रेस रिलीज में आईएमए की तरफ से उठाए गए सवालों के जवाब दिए गए हैं और आरोपों को खारिज किया गया है. 

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आयुर्वेद पर उठाया गया सवाल

पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन ट्रस्ट ने कहा कि आईएमए की तरफ से उठाए गए सवाल भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति पर सवाल उठाने जैसा है. स्टेटमेंट में कहा गया है कि कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ-जीएमपी की गाइडलाइन्स के मुताबिक सीओपीपी लाइसेंस दिया गया है. अब आयुर्वेद पूरी दुनिया में अपना डंका बजा रहा है. खास कर कोरोना महामारी के समय में, तो आयुर्वेद के विरोधी परेशान हैं. आचार्य बालकृष्ण ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की मौजूदगी में कोरोनिल की लॉन्चिंग पर सवाल उठाने वाले मुद्दे को भी खारिज कर दिया है. बता दें कि पतंजलि ने कोरोना को जून 2020 में लॉन्च किया था, जब कोरोना महामारी (Coronavirus) अपने पीक पर थी.

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IMA ने उठाए थे सवाल

पतंजलि की कोरोनिल टैबलेट को विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाण पत्र मिलने की बात को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सरासर झूठ करार देते हुए आश्चर्य प्रकट किया और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन से इस बाबत स्पष्टीकरण की मांग की. पतंजलि का दावा है कि कोरोनिल दवा कोविड-19 को ठीक कर सकती है और साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि की गई है. वहीं, डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी पारंपरिक औषधि को कोविड-19 के उपचार के तौर पर प्रमाणित नहीं किया है.



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